कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं?
तुम कह देना कोई खास नहीं....
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा,
एक झूठ है आधा सच्चा सा,
जज्बात के मन पे एक बहाना सा,
जो पास होकर भी पास नहीं
पर उससे छुपा कोई राज़ नहीं
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं?
तुम कह देना कोई खास ....
जहाँ तरह तरह की बातें हैं...
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं?
तुम कह देना कोई खास नहीं....
एक दोस्त है कच्चा पक्का सा,
एक झूठ है आधा सच्चा सा,
जज्बात के मन पे एक बहाना सा,
जो पास होकर भी पास नहीं
पर उससे छुपा कोई राज़ नहीं
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं?
तुम कह देना कोई खास ....
Posted by Rashmi Prajapati at 12:08 AM 0 comments
Posted by Rashmi Prajapati at 7:37 AM 1 comments
अभिनव के जीतने की खुसी तो पूरा देश मना ही रहा है, इसको देख बड़े दिनों बाद वो पुराणी याद एक बार फ़िर ताज़ा हो गई। जब हम सभी मोहल्लों के मैचों में हमारा मोहल्ला जीत जाता था और हम खूब जश्न मनाते थे। खूब मिठियां खाते थे और मोहल्ले भर की o
Posted by Rashmi Prajapati at 10:18 PM 0 comments
बारिश के मौसम में भोपाल की सुबह और शाम दोनों ही भीगे भीगे से दिख रहे हैं । इस मौसम में शयाद कोई ही ऐसा व्यक्ति होगा जिसे भोपाल की झील के साथ भीगना पसंद नही होगा। सुकर है की मैं उन लोगों के से नही हूँ जिन्हें बारिश नहीं पसंद है । मेरे भोपाल आने से पहले मैंने भोपाल की मनमानी और सभी को मस्त कर देने वाली बारिश के बारे में मैंने बचपन से ही काफी सुना था और कुछ ऐसा ही मंजर यहाँ पाया भी ।
बारिश में झील के किनारे पानी की बूंदों को वापिस पानी में मिलते देखना मुझे बचपन से ही बहुत पसंद था । मगर माँ की डांट और गुस्से के कारण कभी भी किसी भी झील या पानी से भरी जगह के पास जाने की हिम्मत नही जुटा पाई । यहाँ आकर सबसे पहले अपने मन की बचपनसे अधूरी इच्छा को पूरा किया और आज तेज बारिश में भोपाल की मशहूर बड़ी जील घूम कर आई । यह वाकई बहुत ही सुहावना मंजर था जब बारिश की वे नन्ही नन्ही बूंदे वापस पानी में ही मिल रही थीं। बारिश की बूंदों का झील के पानी में पर पानी का उचल जाना देख मै समझ नही पा रही थी की इस तरह पानी का उछालना उन बूंदों का स्वागत करना है या फ़िर उनकू ये याद दिलाना की तुम पानी बनने के आलावा कुछ और काम नही आ सकते। तुम न ही सीप में गिरे जो मोटी बनते न ही केले ले पत्तों के झुंड में जो कपूर बन जाते न ही तुम्हें देवता के चरणों को धोने का मौका मिला न ही प्यारे बच्चों के साथ खेलने का।
लेकिन अचानक ही मेरे मन में यह ख्याल आया कि पानी के इस तरह उछालने का मतलब उन बूंदों के लिए एक नए सु अवसर कि बधाई भी तो हो सकती है जो वह झील उसे देना चाहती थी। मुझे लगा कि श्याद ये झील का पानी यह कहने कि कोशिश कर रहा है कि बूंदों तुम्हारा स्वागत है और बधाई भी कि तुम किसी ग़लत जगह गिरने कि जगह वापस लौट आए। तुम्हें बधाई कि तुम्हारे सामने अब तरक्की के और भी नए रस्ते खुले हैं।
Posted by Rashmi Prajapati at 7:20 AM 2 comments
भोपाल के बच्चे इन दिनों कुछ अलग और खास करने की चाहत में कुछ खास सबजेक्ट कोम्बिनेशंश पसंद कर रहे है। इन कोम्बिनेशंश में इस बार मैथ्स बायो और कॉमर्स के साथ सैकोलोगी फाइनआर्ट्स और फिसिकल एजुकेशन शामिल हैं। शहर के बच्चों की यह पसंद चाहे नम्बर जादा पाने की चाहत में हो मगर यह बात तो है ही की इससे उनके कैरियर के कई नए रस्ते भी खुल गए हैं।
शहर के बच्चों के इस तरफ़ बदते रुझान से न केवल उनके पेरेंट्स खुश है बल्कि बच्चों के अध्यापक भी काफी खुश नजर आ रहे है। इन कोम्बिनेशंश को चुनने वालों की संख्या इस समय करीब १०० से भी ज्यादा है। जिसमें भी मैथ्स के साथ सैकोलोगी और फाइन आर्ट्स लेने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है।
Posted by Rashmi Prajapati at 6:58 AM 0 comments
Posted by Rashmi Prajapati at 6:45 AM 1 comments
Posted by Rashmi Prajapati at 8:15 AM 0 comments